फर्जी पत्रकारों के लिए खतरे की घंटी, जाना पड़ सकता है जेल

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लखनऊ-जौनपुर ,भदोही ,आजमगढ़ ,वाराणसी ,चंदौली ,गाजीपुर ,मिर्जापुर ,सोनभद्र ,प्रयागराज सहित प्रदेश के अन्य जिलों में तथाकथित फर्जी पत्रकारों पर होगी कार्रवाही।

पुलिस फर्जी पत्रकारों की करेगी गहनता से जांच जनप्रतिनिधियों की लगातार शिकायतों पर संज्ञान लिया गया है। पत्रकारिता को बदनाम करने व पत्रकारिता की आड़ में धंधा चलाने वालों एवं आपराधिक गतिविधियो पर पर्दा डालने वाले फर्जी पत्रकारों पर पैनी नजर रखने का निर्देश मुख्यमंत्री कार्यालय से दिया गया है। प्रेस लिखी गाड़ियों और बाइक सवार के प्रेस का परिचय पत्र की भी जांच की जायेगी ,जांच में फर्जी पाए जाने पर गाड़ी को सीज किया जाएगा। फर्जी प्रेस कार्ड लेकर घूमने वाले तथाकथित पत्रकारों को जेल भेज दिया जाएगा।

इन दिनों पूरे प्रदेश में फर्जी पत्रकार बनने और बनाने का गोरखधंधा तेजी से बढ़ता जा रहा है। अधिक संख्या में सड़कों पर चार पहिये वाहन और बाइक पर प्रेस लिखे वाहन चारों तरफ दिख रही है। पुलिस ऐसी गाड़ियों की जांच करते हुए बिना कागजात वाली गाड़ियो को सीज करेगी। फर्जी आईडी व प्रेस कार्ड के आधार पर मुकदमा दर्ज करेगी। फर्जी पत्रकार अपनी गाड़ियों में बड़ा-बड़ा प्रेस का मोनोग्राम तो लगाते ही है साथ ही साथ फर्जी आईडी कार्ड बनवाकर घूमते भी रहते है। लगातार बढ़ती फर्जी पत्रकारों की फ़ौज से जहाँ पुलिस तो परेशान रहती है वही, सत्ताधारी व गैर सत्ताधारी और ग्राम पंचायतों के प्रधान भी इन से आजिज आ चुके है। जानकारों का कहना है कि कुछ ऐसे भी है जिनके पास किसी भी अख़बार या मैग्जीन का परिचय पत्र भी नही है उनका भारत सरकार द्वारा जारी लाइसेंस भी नही रहता है और पूछे जाने पर अपने को मीडिया वाला बता देते है। प्रदेश के कई जनपदों से लॉकडाउन में ऐसे कई तथाकथित पत्रकारों को जेल भी भेजा गया था।

लखनऊ के एक आला अधिकारी से जब इस बाबत पूछा गया तो वह बोले कि यदि जांच में फर्जी पाया गया तो उसे संगीन अपराध मानते हुए आईपीसी की धाराओं में मुकदमा पंजीकृत होगा।

एक बड़े नेता से राय मांगी गई तो नाम न बताने की शर्त कहा कि भाई बुरा मत मानना, कुछ तो ऐसे पत्रकार है जिनको ठीक तरह से लिखना पढ़ना और बोलना भी नहीं आता है बरसाती मेंढक की तरह तो हर जगह पत्रकार बन बैठे है।

सचिवालय से बताया गया कि चक्की चौराहों पर पुलिस से बचने के लिए अपने वाहनों पर प्रेस लिखवा लेते है अब उनकी खैर नही हैं, वहीं जो पत्रकारिता के नाम पर अपना काला धंधा चला रहे है उनके लिए यह बुरी खबर है। ख़ुफ़िया विभाग व पुलिस ऐसे लोगो को सबक सिखाने के मूड़ में पूरा मन बना चुकी है।


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