मल्हनी उपचुनाव,कहीं हताशा और जीतने की ललक में तो पैसा नहीं बाँटा गया!

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जौनपुर-प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भयानक अपशब्दों से नवाज़ने वाला तथा फ़ेसबुक पर भी बहुत ही घटिया बातें प्रधानमंत्री के लिये लिखने वाला दिलीप बलवानी जो की धोखेबाज़ी व धूर्तता में जेल की हवा भी खा चुका है वो मल्हनी उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी का प्रस्तावक है।अभी इसका विवाद थमा भी नहीं था की भाजपा प्रत्याशी द्वारा मल्हनी विधानसभा के उपचुनाव में 500-500 रुपए बांटने का फोटो वायरल होने पर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

जब भाजपा प्रत्याशी से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हां उन्होंने ₹500 दिया है और एक जाति विशेष के नाम पर जोर दे कर बार-बार बोल रहे थे कि हां उन्होंने ₹500 दिए हैं तो क्या गुनाह कर दिए है।क्या बताना चाह रहे थे की उक्त जाती विशेष के लोग पैसों पर ही वोट देंगे या ये बताना चाह रहे थे की आदर्श आचार संहिता सिर्फ़ विपक्षियों के लिये है।ये भाजपा को रोज़ नए विवाद कभी बलवानी तो कभी पैसा बाँटने जैसे विवाद उपहार स्वरूप दे रहे हैं।कहीं इसका ख़ामियाज़ा पार्टी को चुनाव में न भुगतना पड़ जाये!

सवाल यह उठता है कि अगर यही पैसे बाँटने का कार्य पूर्व सांसद एवं वर्तमान प्रत्याशी मल्हनी धनंजय सिंह द्वारा किया जाता या सपा अथवा बसपा या किसी अन्य प्रत्याशी द्वारा पैसा बांटा गया होता और इस तरीके से तस्वीर वायरल हुई होती तो क्या तब भी चुनाव आयोग कोई कार्यवाही नहीं करता ? क्योंकि भाजपा प्रत्याशी द्वारा पैसा बांटने के बाद टीवी पर यह बोलना हाँ उन्होंने पैसा दिया है।लोगों को इंतजार है कि चुनाव आयोग इस पर क्या करता है,क्यूँकि भाजपा कहती है कि नियम क़ानून सबके लिए समान है।

भाजपा प्रत्याशी कहीं न कहीं ये अंदाज़ा लगा लिये हैं कि मल्हनी से लखनऊ की डगर इतनी आसान नहीं है जितनी की वो समझ रहे थे।उन्हें निश्चित लग रहा है कि चुनाव उनके हाथ से निकल गया है!इसीलिए वह पैसा बांट रहे हैं।

पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मल्हनी विधान सभा के ही थे और चुनावी मैदान में किस्मत आजमाई थी लेकिन वह चौथे स्थान पर रहे।इस बार भाजपा प्रत्याशी मल्हनी विधानसभा से बाहर के हैं जो की चर्चा का विषय है कि क्या भाजपा को मल्हनी में कोई प्रत्याशी नहीं मिला।

जहां सपा प्रत्याशी अपने पिताजी के नाम पर वोट मांगते घूम रहे हैं और बसपा प्रत्याशी अपने मूल वोटरों के सहारे बैठी हैं वही पूर्व सांसद धनंजय सिंह क्षेत्र में अपने किए गए या कराए गए कार्यों को लेकर मैदान में ताल ठोके हुए हैं उनके कार्यकर्ता हर गांव हर बस्ती में उनका झंडा लिए खड़े हैं।

मल्हनी के लोगों का कहना है की हमारे सुख-दुख में धनंजय सिंह ही सामने दिखते हैं उन्होंने ही सड़कें दी बिजली दी हैं किसी का इलाज कराया है तो किसी के पढ़ाई का खर्चा उठाया है और अगर हैंड पाइप की बात करें तो लगभग हर गांव में हर बस्ती में पूर्व सांसद द्वारा दिए गए हैंड पाइप के नल से लोग पानी पी रहे हैं और कह रहे हैं कि अभी तक जो भी दिया गया है वह पूर्व सांसद धनंजय सिंह द्वारा ही दिया गया है या किया गया है तो इस बार इनको फिर से मौका दिया जाना चाहिए क्यूँकि चुनाव के बाद इनके अलावा कोई दिखता नहीं है।

यह सारी बातें छात्र राजनीति से प्रदेश की राजनीति में आए भाजपा प्रत्याशी को भी भलीभांति मालूम पड़ रही है कहीं इसी सबसे वह हताशा में तो नहीं आ गए हैं और लगे पैसा बांटने।

जाति विशेष का नाम लेकर सीना ठोक कर कह रहे हैं कि हां मैंने पैसा दिया है।अगर दिया है क्यों दिया है ? क्या यह पैसा देकर सहायता करने का उचित समय है जबकि आदर्श आचार संहिता लागू है।

भाजपा प्रत्याशी छात्र राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं या सत्ता के नशे में चूर है क्योंकि नामांकन के दिन भी प्रशासन द्वारा इनकी जो आवाभगत की गई थी वह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब चुनाव जीतने से पहले इनका यह हाल है तो अगर यह जीत के आते हैं तो क्या करेंगे।

फिलहाल जहां सारे प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं और जमीन आसमान एक किए हुए हैं वही भाजपा प्रत्याशी एक हाथ में नोटों की गड्डी पकड़े हुए हैं और दूसरे हाथ से निकाल-निकाल कर लोगों का दुख दर्द दूर कर रहे हैं अब यह तो 3 तारीख को ही पता चलेगा जब दुख दर्द दूर करने वालों का भाग्य मतपेटिकाओ में बंद हो जाएगा।


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