मुंबई BMC की तर्ज़ पर उत्तर प्रदेश में पुलिस बनी न्यायपालिका और दे रही आदेश

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लखनऊ/अम्बेडकर नगर- पुलिस द्वारा NTPC को पत्र लिखा गया है की“ प्रिया कान्लट्रक्शन्स ” को ठेका दिया गया है जिसे निर्माण कार्य हेतु गिट्टी,मोरंग की सप्लाई का कार्य कम्पनी किया जा रहा है इस पत्र में बताया जा रहा है की पवन सिंह पुत्र हरिहर सिंह निवासी अयोध्या है जो साँई कंस्ट्रक्शन एण्ड सप्लायर्स के मालिक हैं।जो की NTPC से नियमो के तहत मिले ठीके के कार्य को करा रहे हैं,तथा उनकी फ़र्म का सारा कार्य बैंक द्वारा होता है व इस फ़र्म पर बैंक से लोन भी है।

किंतु ज़िले के आला पुलिस का कहना है की इस फ़र्म में माफिया अपराधी अजय प्रताप सिंह की सम्पूर्ण धनराशि लगी हुई है और इस फ़र्म पर मिले कार्य को तत्काल निरस्त कर देना चाहिये जिस से की अजय सिंह की आपराधिक गतिविधियों पर रोक लग सके क्यूँकि अजय प्रताप सिंह का सारा धन इसी फ़र्म में लगता है।

बताते चलें कि अजय प्रताप सिंह ब्लाक प्रमुख हैं तथा एक सम्मानित पद पर हैं और विधान सभा का चुनाव भी लड़ चुके हैं जिसमें उनको 22000 से ज़्यादा मत प्राप्त हुए थे जबकि दूसरी तरफ़ उनके मुक़दमे न्यायालय में विचाराधीन हैं तब पुलिस द्वारा उनको ‘शातिर क़िस्म का’ ‘अपराधी व माफिया ‘ जैसे सम्बोधन कर के NTPC को काम निरस्त करने के लिये पत्र किस आधार पर लिख दिये तथा उसमें ये भी लिखा है की साक्ष्यों के आधार पर किंतु बिना साक्ष्य के कोई कैसे ऐसे किसी को कह सकता है।

पवन सिंह का कहना है की इस फ़र्म में सारा पैसा उनका लगा है जो कि पिताजी के फंड रिश्तेदारों से उधार और बैंक के लोन द्वारा जुटाया गया है,इसमें किसी भी अन्य फ़र्म या व्यक्ति का एक भी पैसा नहीं लगा है जो कुछ भी लगा है वो उनका निजी पैसा है। पवन सिंह का कहना है की मेहनत कर के ईमानदारी से किये जा रहे काम को पुलिस बेवजह ग़लत बता रही है।

साँई कान्सट्रक्शन्स एण्ड सप्लायर्स के कोर्ट में जाने पर न्यायालय ने अम्बेडकर नगर पुलिस से पूछा है कि किस अधिकार के तहत आपने NTPC को कार्य निरस्तीकरण के लिखा पत्र लिखा जबकि सारा कार्य नियमो के तहत किया जा रहा है, इस पर अम्बेडकर नगर पुलिस द्वारा 14 दिन वक़्त माँगा गया है।

अब देखना है की न्यायालय में पुलिस कहा से किस आधार पर साँई कान्सट्रक्शन्स एण्ड सप्लायर्स में अजय प्रताप सिंह का पैसा लगने की बात प्रस्तुत करती है।

जबकि फ़र्म के मालिक कहना है कि उनका सारा हिसाब-किताब खुला है जब जो चाहे आ कर देख सकता है और उनके ऊपर हो रहे मानसिक उत्पीड़न को बंद करने की विनती की है।

अब देखना है की और आगे पुलिस फ़ैज़ाबाद और अम्बेडकर नगर के किन-किन माननीयो के पैसों का हिसाब-किताब टटोलती है या सिर्फ़ उनको यही एक फ़र्म का हिसाब देखना था।


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