नौकरी में दिव्याँग प्रमाण पत्रों के सहारे पात्र बनते अपात्र

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बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की फर्जी नियुक्तियों को लेकर मामला गहराया हुआ है।

लखनऊ- वर्ष 2010 से अब तक हुई सभी भर्तियां इस जांच के दायरे में होगी।

शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के साथ ही कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं को शामिल किया गया है। शासन के अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने बुधवार को प्रदेश के सभी डीएम को इस बाबत पत्र लिखा है, जिसमें 20 जुलाई 2018 को गठित जांच समिति में फेरबदल किया गया है। अब जांच समिति में अपर जिला मजिस्ट्रेट को अध्यक्ष, अपर पुलिस अधीक्षक को सदस्य और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को सदस्य सचिव के रूप में तीन सदस्यीय समिति नामित की है।

पत्र में कहा है कि सभी जनपदों के परिषदीय स्कूलों में अनियमित/फर्जी रूप से की गई नियुक्तियों के सम्बंध में जांच सम्पादित कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाये।

शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जाँच के साथ साथ बहुत से लोगों ने दिव्याँग प्रमाण पत्र बनवा कर लगाया हुआ है, अगर दिव्याँग प्रमाण पत्रों की सघन जाँच की जाय तो बहुत से अपात्र निकलेंगे जो इसका दुरुपयोग धड़ल्ले से कर रहे है,वो चाहे नौकरी हो या अन्य कही दिव्याँग सम्बंधित सुविधा लेनी हो।
ज़्यादातर लोगों ने पैसों के दम पर बधिर प्रमाण पत्र बनवाया हुआ है जो की जाँच होने पर सामने आयेगा।

बताते चलें कि जब से फ़र्ज़ी प्रमाण पत्रों की जाँच शुरू हुई है तभी से फ़र्ज़ी प्रमाण पत्रों के सहारे नौकरी पाने वालों में खलबली मची हुई है।


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