कर्तव्यपथ पर अग्रसर पूर्व सांसद धनंजय सिंह

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जौनपुर : कोरोना से फैली महामारी से निपटने के लिए सरकार के साथ ही तमाम सामाजिक संगठन और मशहूर हस्तियां भी काम कर रही हैं। मिडिया द्वारा दिया गया नाम बाहुबली,रॉबिनहुड लेकिन जनता द्वारा जनबली नाम से बुलाये जाने वाले पूर्व सांसद धनंजय सिंह का योगदान सर्वोपरि दिख रहा है।उनके इस योगदान की जितनी सराहना की जाय कम है। लॉकडाउन के बाद 27 मार्च से प्रतिदिन पूरे जौनपुर जनपद में अधिक से अधिक गरीब, निराश्रितों, विधवाओं और दिव्यांगों को दैनिक उपयोग की सामग्री, राशन और आर्थिक सहयोग प्रदान करने वाले सांसद सिंह ने अब तक हजारों से अधिक जरुरतमंदों को खाद्यान्न और दैनिक उपयोग की वस्तुएं मुहैया कराई हैँ, साथ ही प्रशासन के वो कर्मचारी जो जनता की सुरक्षा के लिये अपनी जान जोखिम में डालकर भी सड़कों और हॉस्पिटलों में लगे हैं उनको भी लंच पैकेट उपलब्ध करवाया जा रहा और लॉकडाउन तक अनवरत करवाते रहेंगे।

आज इस महामारी के दौर में जब असहायों को सबसे अधिक सहयोग की आवश्यकता है उस समय कुछ माननीय कोरेंटाइन में चले गये हैं, परंतु धनंजय सिंह के छोटे भाई समान एमएलसी जौनपुर बृजेश सिंह प्रिंशु पूरी निष्ठा व तन्मयता के साथ लोगों के मध्य इस संकल्प के साथ उपस्थित हैं कि किसी भी व्यक्ति को भूखे नहीं रहने दिया जायेगा।उनका यह प्रयास अन्य नेताओं के लिये अनुकरणीय है। इसके इतर टीम धनंजय सिंह के अन्य वरिष्ठ सदस्य पूर्व प्रमुख आशुतोष सिंह,कुमार सिद्धार्थ सिंह बॉबी, नवीन सिंह, आनंद सिंह आदि लोग सेवा भारती के माध्यम से भी लंच पैकेट का वितरण अनवरत कर रहे। साथ ही धनंजय सिंह यूथ ब्रिगेड के युवा साथी और जौनपुर बेकर्स के अधिष्ठाता रत्नदीप शर्मा साजन, पहलवान बजरंगी यादव,आनंद यादव व उनकी पूरी टोली प्रतिदिन सैकड़ों गरीबों को राशन व लंच पैकेट बिना किसी स्वार्थ के पहुंचाती है वह आज के युवाओं के लिये अनुकरणीय व एक प्रतिमान स्थापित कर रही है। इनके अलावा इनकी टीम के बहुत से सदस्य अपने कर्तव्य पथ पर अग्रसर हैं।

सांसद व एमएलसी ने कहा जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी अधिक

‘वो पथ क्या पथिक कुशलता क्या, जिस पथ में बिखरे शूल न हों। नाविक की धैर्य कुशलता क्या, जब धाराएं प्रतिकूल न हो।‘ इन पंक्तियों के साथ सांसद कहते हैं कि परिस्थितियां कितनी भी विकट हो सेवा का भाव जागृत रहना चाहिए। कठिन परिस्थितियों को उच्च नैतिक बल से खत्म करना हमारे जीवन का मूल मंत्र रहा है। जीवन अनमोल है, संकट भी गंभीर है लेकिन संकट के इस दौर में हम आपको अकेला छोड़ दें ये हमारी संस्कृति नहीं।

गंभीर संकट के दौर में जब पूरा विश्व अपने घरों में कैद है तब भी अधिकारी, पुलिस और डाक्टर अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा और लगन के साथ निभा रहे हैं, जबकि समाज के प्रति जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी उनसे कहीं बढ़कर है। इससे बड़ा संकट हम लोगों के जीवन में फिर कभी न आए ऐसी कामना करते हुए दिल खोल कर अपने लोगों की मदद करने की जरूरत है। राजनैतिक व्यक्ति के लिए इस से बड़ा पुनीत कोई कार्य नहीं हो सकता।


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